हम में से कई लोगों के भीतर ये सवाल कभी न कभी जरूर उठा होगा कि आखिर मच्छर क्यों कुछ लोगों को ज्यादा तो कुछ लोगों को कम काटते हैं? इसी कड़ी में आज हम जानेंगे कि आखिर मच्छर क्यों कुछ लोगों को अपना ज्यादा शिकार बनाते हैं? मच्छर कई गंभीर बीमारियों के जनक होते हैं। इनके काटे जाने से व्यक्ति के भीतर कई तरह की गंभीर समस्याएं जन्म लेती हैं। मच्छर कई खतरनाक बीमारियों के वाहक भी होते हैं। दुनिया भर में हर साल हजारों लोगों की मौत इनके द्वारा काटे जाने की वजह से होती है। इस कारण मच्छरों से निजात पाने के लिए कई देशों में विशेष प्रकार के अभियान चलाए जाते हैं। वहां पर साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता है। वे अंडे ना दे पाएं इस कारण किसी भी जगह पर ज्यादा दिनों तक पानी को इकट्ठा नहीं होने दिया जाता। इसी सिलसिले में आज हम ये जानेंगे कि आखिर मच्छर कुछ लोगों को ज्यादा तो कुछ लोगों को कम क्यों काटते हैं?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंसानों का पता लगाने के लिए मच्छर हमारे द्वारा छोड़ी जाने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड का इस्तेमाल करते हैं। करीब 10 से 50 मीटर की दूरी पर मच्छर हमारे द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाई ऑक्साइड से हमारा पता लगा लेते हैं।करीब 5 से 15 मीटर की दूरी आने के बाद मच्छरों को इंसान दिखने लगते हैं। इंसानों के करीब तक पहुंचने के लिए वे अपने विजुअल्स का इस्तेमाल करते हैं। वहीं जब वे हमारे शरीर के बिल्कुल नजदीक पहुंच जाते हैं, तो शरीर की गर्मी को भांप कर वे निश्चित करते हैं कि व्यक्ति को काटना है या नहीं।हमारा सवाल था कि आखिर मच्छर क्यों कुछ लोगों को ज्यादा तो कुछ लोगों को कम काटते हैं? आपको बता दें कि जिस व्यक्ति के शरीर के भीतर से लैक्टिक एसिड केमिकल ज्यादा निकलता है। उनको मच्छर अधिक काटते हैं। वहीं कई वैज्ञानिक परीक्षणों में इस बात का पता चला है कि जिस इंसान का ब्लड ग्रुप O होता है उन लोगों को भी मच्छर अपना ज्यादा शिकार बनाते हैं।
यही नहीं व्यक्ति का शारीरिक ढांचा और उसकी एक्टिविटी को देखकर भी मच्छर इंसानों को काटने के लिए आकर्षित होते हैं। मोटे या फिर जो लोग शारीरिक एक्टिविटी कम करते हैं। उन लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं।
