अंतरिक्ष में लाखों गलैक्सियां
हमारे वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में लाखों गलैक्सियां मौजूद हैं। इनमें लाखों सूर्य, तारे, चंद्रमा, धरती, ग्रह, उपग्रह, उल्का और ब्लैक होल हैं। वैज्ञानिकों ने गैलेक्सी में असंख्य तारामंडल की खोज की है। जिस धरती पर हम सभी रहते हैं उस गैलेक्सी का नाम मिल्की वे है। माना जाता है इसी गैलेक्सी में धरती जैसे ग्रहों पर जीवन हो सकता है। यहां रहने वाले मनुष्य इस धरती पर रहने वाले मनुष्यों से बुद्धिमान हों। वैज्ञानिको ने अब तक 800 से ज्यादा गैलेक्सियां खोज निकाली हैं। उनका कहना है कि करीब अंतरिक्ष में 19 अरब गैलेक्सियां हो सकती हैं।
ब्लैक होल
ब्लैक होल वह जगह है जहां पर भौतिक का कोई नियम काम नहीं करता है। ब्लैक होल ब्रह्मांड का ऐसा सघन ऑब्जेक्ट है जिसमें गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक है कि इससे लाइट भी बच कर नहीं निकल पाती है। विज्ञान के अनूसार इसका निर्माण विशाल तारों के अंदर होने वाले महाविस्फोट (सुपरनोवा) की वजह से होता है। विज्ञान का दायरा बढ़ने के साथ ही ब्लैक होल के कई रहस्यों का पता लगा है, लेकिन आज भी कई रहस्य हैं।
मंगल ग्रह
वैज्ञानिको का मानना है कि कभी धरती की तरह मंगल ग्रह पर भी बड़े-बड़े समुद्र और जल धाराएं हुआ करती थीं। लेकिन करोड़ों साल पहले मंगल के कमजोर हुए गुरुत्वाकर्षण की वजह से इसकी मैग्नेटिक फील्ड कमजोर हो गई होगी और इसके चलते मंगल ग्रह की सतह का सारा पानी भाप बन गया हो या फिर सतह के भीतर ही ठंडा होकर जम गया हो। दूसरी बात यह है कि अगर कोई प्रजाति मंगल ग्रह पर रही होगी तो जल की कमी और सूर्य की हानिकारक किरणों के चलते समाप्त हो गई होगी। नासा के ऑर्बिटर्स से मंगल की सतह की जो जानकारी सामने आई है। अब उससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या करोड़ों साल पहले मंगल ग्रह पर भी पृथ्वी की तरह ही जीवन था। अभी यह एक रहस्य है।
कितना विशाल है ब्रह्मांड?
ब्रह्मांड कई गुना विशाल है या कहें अंतहीन है यह किसी को नहीं पता। लेकिन वैज्ञानिकों ने अभी तक ब्रह्मांड में 150 बिलियन्स आकाशगंगाओं का पता लगा लिया है। एक रिसर्च के मुताबिक, जितनी आकाशगंगाओं की जानकारी मिली है उनकी संख्या 250 गुना से भी अधिक हो सकती है। यह संख्या इतनी अधिक है कि अगर इसे किसी इंटरनेट ब्राउजर पर सर्च करें, तो ब्राउजर को क्रैश कर सकता है। कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि एक मटर के दाने के समान यह जानकारी है। इसकी वजह से वैज्ञानिकों के पास इन पदार्थों की कोई जानकारी अभी तक नहीं है।
डार्क मैटर और डार्क एनर्जी
अंतरिक्ष का 95 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से बना हुआ है जबकि बचा 5 प्रतिशत हिस्सा भौतिक पदार्थों से बना है जिनमें ग्रह, नक्षत्र, तारे शामिल हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी से ब्रह्मांड का अस्तित्व बना है। डार्क मैटर का निर्माण ऐसे पदार्थों से हुआ है जो लाइट को ऑब्जर्व और रिफ्लेक्ट नहीं करते। इसकी वजह से वैज्ञानिकों के पास इन पदार्थों की कोई जानकारी नहीं है।
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