क्या है भारत रत्न, किन्हें मिलता है यह सम्मान - what is bharat ratna award and who got the bharat ratna award first

 


 आइए जानते हैं कि भारत रत्न क्या है और किसे दिया जाता है। इसकी शुरुआत कब हुई थी और पहला भारत रत्न किसे दिया गया था।
किसे दिया जाता है:
    यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने देश के किसी भी क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हों।
    अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया हो।
    यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान के क्षेत्र में तथा किसी राजनीतिज्ञ, विचारक, वैज्ञानिक, उद्योगपति, लेखक और समाजसेवी को असाधारण सेवा हेतु व उच्च लोक सेवा को मान्यता देने के लिए भारत सरकार की ओर से दिया जाता है।
भारत रत्न की स्थापना:
    भारत रत्न की शुरुआत 2 जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की थी।
    1954 में सर्वप्रथम भारत रत्न सी. राजगोपालाचारी, सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सी. वी. रमन को दिया गया था। उस समय केवल जीवित व्यक्ति को यह सम्मान दिया जाता था।
    1955 में मरणोपरांत भी सम्मान देने का प्रावधान भी जोड़ दिया गया।
    2013 में पहली बार खेल के क्षेत्र में नाम कमाने वालों को भी भारत रत्न देने का निर्णय लिया गया और इसी कड़ी में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को इस सम्मान के लिए चुना गया।
    2013 में सचिन तेंदुलकर के साथ वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव को भी भारत रत्न दिया गया।
क्या मिलता है सम्मान में:
    भारत रत्न पाने वालों को भारत सरकार की ओर से एक प्रमाणपत्र और एक पदक मिलता है।
    इस सम्मान के साथ कोई धनराशि नहीं दी जाती।
    इसे पाने वालों को विभिन्न सरकारी विभाग सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।
    प्रधानमंत्री द्वारा भारत रत्न दिए जाने की सिफारिश राष्ट्रपति से की जाती है। इसके लिए कोई औपचारिक सिफारिश आवश्यक नहीं होती है।
    भारत रत्न पाने वालों को महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है।
    भारत रत्न से सम्मानित हस्तियों को सरकार वॉरंट ऑफ प्रिसिडेंस में उन्हें जगह देती है।
    वॉरंट ऑफ प्रिसिडेंस का इस्तेमाल सरकारी कार्यक्रमों में वरीयता देने के लिये होता है।
    भारत रत्न विजेताओं को प्रोटोकॉल में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, पूर्व राष्ट्रपति, उपप्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता के बाद स्थान मिलता है।


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