चिंता से काम हो जाता है कामयाबी नहीं मिलती

 


विचारों की शक्ति को अहमियत देनी चाहिए

चिंता करने और विचार करने में बहुत ज्यादा अंतर होता है। लेकिन बहुत कम लोगों को ही इन दोनों में फर्क समझ आता है। चिंता करने से काम तो होता है, लेकिन कामयाबी हासिल नहीं होती। वहीं सोचने से हम आगे बढ़ते हैं और नए आयाम खोजते हैं। विचारों की शक्ति का कोई दायरा नहीं, यह तो असीमित है। (द आर्ट ऑफ थिंकिंग क्लियर्ली )

अपने साथ होने वाली हर बात की जिम्मेदारी लें

आप तभी तक खुद के बारे में अच्छा सोचते हैं जब तक खुद के नियंत्रण में होते हैं। अगर किसी दूसरे को जिम्मेदार बनाते हैं तो उन्हें अपना नियंत्रण सौंपते हैं। आप अब भी खुद के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन नियंत्रण दूसरे को सौंपने से मानसिक शांति खो देते हैं। अपने साथ होने वाली हर चीज का श्रेय और दोष खुद लें। (मैनेजिंग वनसेल्फ)

सफल होने के लिए अफलता की जरूरत है

जब असफलता का डर बढ़ जाता है तो यह आपकी सफलता और खुशी की राह में बाधा बन सकता है। सफल होना चाहते हैं तो अपनी असफलता की दर दोगुनी कर दें। सफलता, असफलता के दूसरे सिरे पर मौजूद होती है। असफलता, सबक सीखने का एक तरीका है। इसकी जरूरत सफल होने के लिए पड़ती है। (रोड टू सक्सेस)

मेहनत और त्याग से हासिल होगी सफलता

लोग जीवन में सफल होना चाहते हैं लेकिन उसके लिए मेहनत और त्याग नहीं करना चाहते। बहुत आसानी से हार मान लेते हैं। सफलता का रास्ता असफलता से होकर ही निकलता है। जो हवा के रुख की परवाह न करते हुए, विरुद्ध जाकर भी काम करने के लिए तैयार रहते हैं, वही लोग सफलता हासिल कर पाते हैं। (वर्क एथिक्स)

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